आखिर क्यों झारखंड बिहार से अलग हुआ, ये है वजह

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नमस्कार दोस्तों जैसा की आप सभी जानते है की किसी समय झारखण्ड बिहार का हिस्सा हुआ करता था। मगर किन्ही कारणों से झारखण्ड को बिहार से अलग होना पड़ा। अपने आज के इस ब्लॉग में हम जानेगे की कब और किस वजह से झारखण्ड बिहार से अलग हुआ। वैसे तो अलग होने के कई कारण होते है मगर ये थोड़ा अलग है। अगर आप भी जानना चाहते है की बिहार से अलग क्यों हुआ झारखण्ड तो उसके लिए आपको हमारा आज का ये ब्लॉग पूरा नीचे तक पड़ना जरुरी है इसमें आपको इससे जुडी सभी जानकारी मिल जायगी। 

झारखंड बिहार से अलग क्यों हुआ ?

आखिर क्यों झारखंड बिहार से अलग हुआ, ये है वजह 

  • दोस्तों आपका एक बार फिर बता दूँ की साल 2000 स्व पहले झारखंड बिहार का हिस्सा हुआ करता था। आज हम जानेंगे कि झारखंड राज्य बिहार से अलग क्यों हुआ। 
  • बिहार और झारखंड की भौगोलिक स्थिति के बारे में बात करे तो बिहार का क्षेत्र मैदानी तथा कृषि के लिए उचित है। 
  • जबकि झारखंड का क्षेत्र पहाडी है जो खनिज संसाधनों से भरा हुआ है। 
  • बिहार और झारखंड की भाषा में कोई ज्यादा अंतर नहीं है। जो इन दोनो क्षेत्रों को अलग करता है।
  • आदिवासी जनसंख्या झारखंड में बहुत ज्यादा है, जबकि बिहार में बहुत कम है। उपरोक्त इन्ही कारणों ने बिहार और झारखंड के अलग होने में महत्तवपूर्ण भूमिका निभाई। 

समय-समय पर झारखण्ड को अलग करने की उठी मांग 

सबसे पहले जयपाल सिंह मुंडा की अगुवाई में आदिवासियों ने एक अलग राज्य झारखंड की मांग की। लेकिन 1929 ई. में साइमन कमीशन ने इसे रद्द कर दिया था। इसके बाद 1930 से 1940 के बीच आदिवासी महासभा ने अलग राज्य की मांग के लिए आवेदन किया। 

इसके बाद साल 1949 ई. में देश आजाद हो जाने के बाद आदिवासी महासभा का नाम बदलकर झारखंड पार्टी कर दिया गया था। इसके बाद झारखंड पार्टी Bihar Assembly में धीरे-धीरे मुख्य विपक्ष के तौर पर उभर कर सामने आने लगी थी और फिर अलग राज्य की मांग में भारी तेजी आयी। 

फिर आखिर अगस्त, 2000 को संसद में झारखण्ड को बिहार से अलग होने का बिल पास हुआ। 

आखिरकार 15 नवंबर 2000 को झारखंड एक नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आया और रांची को इसकी राजधानी बनाया गया। 

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